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KANAG HILL- Exploring the Enchanting Beauty of Kanaag Hill in Theog, Himachal Pradesh

  Kanag Hill Theog Kanaag Hill is situated near Theog, a charming town located approximately 32 kilometers from Shimla, the capital of Himachal Pradesh. The journey to Kanaag Hill is as rewarding as the destination itself, with winding roads that offer breathtaking views of lush greenery, pine forests, and snow-capped peaks. Visitors can reach Theog by road from Shimla, and then embark on a short yet memorable trek to reach athe summit of Kanaag Hill. One of the most striking features of Kanaag Hill is its pristine natural beauty. The hill is adorned with dense deodar and pine forests, creating a refreshing ambiance that invigorates the senses. The lush meadows that carpet the landscape are perfect for leisurely strolls, picnics, or simply soaking in the tranquility of the surroundings. During spring, the hill comes alive with vibrant wildflowers, painting the landscape with a riot of color.

Villages of Upper Himachal- Patrog Village

Padrog is a small  & very scenic  village in Theog tehsil of district Shimla in Himachal Pradesh.   It is situated 38km away from district headquarter Theog. Theog is the sub-district headquarter of Padrog village. Dhamandri is the gram panchayat of Padrog village.  Padrog has a total population of 171 peoples. There are about 34 houses in Padrog village. Theog is nearest town to Padrog.

मंजिल

पाना है मंजिल को गर तो तुमको चलना होगा होंगी बाधाएँ कदम-कदम , रोकेगी रास्ता हर डगर रुकना नहीं है थकना नहीं है , बस कदम बढ़ाते रहना होगा पाना है मंजिल को गर तो तुमको चलना होगा| ज़माना कहेगा भी, हंसेगा और भिन्नभिनायेगा सह हर पीड़ा हर अपमान को , बस सर उठाये चलना होगा पाना है मंजिल को गर तो तुमको चलना होगा | माता-पिता के अरमानो को अपने सोजन्यों के सम्मान  को चलना पड़े पथ के काँटों पर तो चलना होगा पाना है मंजिल को गर तो तुमका चलना होगा | तोड़ के सरे बंधन को छोड़ के सारे आनंद को कुछ कर जाने की ललक कुछ पा जाने की ज्वाला को निरंतर जलाये रखना होगा पाना है मंजिल को गर तो तुमको चलना होगा | दिखेगी मंजिल धुंधली दीवारों में क्षणिक जीत या लम्बी हार में मिल गयी अब तो है मंजिल या है बीच मझधार में इस अंधियारे को भी मिटाना होगा पाना है मंजिल को गर तो तुमको चलना होगा | ... सुनील शर्मा... 

मै सत्ता हूँ

अनंतकाल से शाश्वत सत्य हुँ प्रकृति से उत्पन्न परमेश्वर का एहसास हुँ प्राणियों में प्राण हुँ धरती का भी मै आधार हूँ ऋषिजन की वाणी हुँ या अक्षय ज्ञान हुँ ब्रह्माण्ड में शुन्य का भी मैं  साक्षात्कार हूँ | मै सत्ता हूँ निर्लज हुँ, निशब्द हुँ या निर्गुण, निराधार हुँ समाज में परिभाषित मैं  विभिन्न प्रकार हूँ धर्मराजों की अयोध्या हुँ, मक्कारों की लंका हुँ रत्न जड़ित सिंहासन हूँ, काँटों का भी मैं   ताज हूँ | मैं  सत्ता हूँ किसानो का विश्वास हुँ  बेरोजगारों की भी आस हूँ विकास की राह हूँ या वोट का व्यापार हुँ अँधा हुँ , बेहरा हुँ  या मदमस्त बैठ  मैं भी लाचार हूँ मैंसत्ता हूँ वही किस्सा वही व्यवहार हूँ नाटक पुराना  नया किरदार हुँ , मैं ही भ्रष्ट मैं ही चौकीदार  हूँ मैं सत्ता हूँ...... .. सुनील शर्मा ..

एक किसान का जब अवतार हुआ

एक किसान का जब अवतार हुआ तन पे कोई वस्त्र न था था केवल हाथों में वो औजार लिए भटकना न उसे अब जंगल - जंगल न था सोना भूखे  पेट लिए शिशुओं के उस रुदन को, जवानो के बाहुबल को आकाश ने छप्पर अब  फाड़ दिया माँ धरा ने भी हृदयी उपहार दिया ऊगा तब एक दाना अन्न का जिसने पेट भरा जन-जन का उठ खड़ा उमंगित हुआ  हर तन-मन बही जो   क्रांति-धारा , फैली  हर वन-उपवन बलवती हो उठी नयी आशाएं जीवन की भी  बदल गयी परिभाषाएं बसने लगे अब गांव-नगर मिल गयी थी उन्नत जो डगर जय-जयकार तब पालनहार हुआ एक किसान का जब अवतार हुआ  | 

Maha Shivratri - The festival of Lord Gauri Shankar

Maha Shivratri- The festival of Lord GauriShankar Maha Shivratri - The festival of Lord GauriShankar Lord GauriShankar Maha Shivratri  is a  HINDU  festival celebrated annually in reverence of the god  SHIVA . It is the day Shiva was married to the goddess  PARVATI . The Maha Shivratri festival, also popularly known as 'Shivratri'   or 'Great Night of Shiva', marks the convergence of Shiva and  Shakti . Maha Shivratri is celebrated on  the day is Krishna Paksha Chaturdashi of Hindu calendar month  PHALGUNA  which falls in Feb.   or  March  as per the Western Calender.    Of the twelve Shivaratris in the year, the Maha Shivarathri is the most holy. The festival is principally celebrated by offerings of  BAEL  leaves and Abhishek of  Milk  or Water to Shiva, all-day fasting and...

'निट्टू'

सड़क के एक किनारे सिकुड़ा बैठा रहता 'निट्टू' अपनी व्यथा का मर्म सहता, अपनी दुर्गन्ध में शुन्य  बैठा रहता 'निट्टू' ना कुछ पाने की आशा न कुछ खोने का डर किसी से कुछ न कहता, किसी की न कुछ सुनता अपने ही अंतर्विरोध में लीन बैठा रहता 'निट्टू' सब पूछते कौन है  यह ? कोई कहता पागल है कोई कहता है अधपागल कोई कहता था किसी ज़माने का विद्वान अब न जाने क्यों बेखबर अपनी ही धुन में  बैठा रहता 'निट्टू' पूछा उसके घरवालों से तो कहते, करता था साधू का सेवा - संग हर रोज घंटो मंदिर में ही बैठा रहता था 'निट्टू' मिली जो न संभाल पाया शक्ति को वो भीषण तरंग हो गया बेसुध न रही चिंता अपनी पत्नी संतान की, न अपनी धरती- पहचान की न नहाता है न धोता, खाने को गर कुछ दे तो खा लेता नहीं तो चुपचाप  किसी अँधियारे कोने में ही बैठा रहता है 'निट्टू' मिल जाता है बाजार में किसी दूकान के आगे किसी सड़क के कोने में बैठा 'निट्टू' कोई उसका अब  हाल न पूछे न कोई उसका मन सबको एक टकटकी लगाए बस देख सिकुड़ा  बैठा रहता 'निट्टू' .... सुनील शर्मा

विडम्बनाओं से घिरा यह देश

विडम्बनाओं से घिरा यह देश जंहा  कानून सर्वोपरी , सर्वोच्च शक्ति का है मालिक पर अँधा (ध्रितराष्ट्र ) कहलाने वाला है जंहा धर्म आस्था , आदर का है पवित्र प्रतीक पर जकड़ा ही रहने वाला है जंहा राजा का राज नहीं , है जनता पर फिर  भी नेता ही राज करने  वाला है जंहा पड़-लिख गए  हो गए सब शिक्षित पहुँच गए चंद्र-मंगल तक पर बेरोजगारी व् भ्रष्टाचार का बोलबाला  है जंहा धरती उगल रही सोना, उपजा रही हीरे- मोती पर किसान का हाल आत्महत्या वाला है जंहा हो रही बात विश्व गुरु की वैश्विक बौद्धिक पहचान की पर अपनी ही कुरीतियों , कट्टरताओं में फंस देश कंहा महान रहने वाला है विडम्बनाओं से घिरा यह देश ... .. सुनील शर्मा

ऐ हिमालय

ऐ हिमालय मेरा विश्वास है की तमाम कोशिशों के बावजूद तुम  हमेशा जीवंत रहोगे, बर्फ से लदकद हरी-भरी घाटियों से जीवन धारा को बहाते  हुए ऐ हिमालय मेरा विश्वास है की तुम हमेशा अडिग, उन्नत , एकाग्रचित परम ध्यान में हमेशा शुन्य ही  रहोगे ऐ हिमालय मेरा विश्वास है की तुम्हारे हर बिखराव में  तुम्हारे हर कटान से मै भी बिखरता जाऊंगा प्रकृति की इस अनमोल विरासत से परे होता जाऊंगा ऐ हिमालय मेरा विश्वास है की प्रकृति की इस धरोहर को सहेजने के कर्तव्य में मनुष्य भी पुण्यशील होगा तुम्हारे  भाग्यविदान - महान अस्तित्व के लिए हमेशा कर्मशील रहेगा ऐ हिमालय मेरा विश्वास है की तुम हर चुनौती, हर बाधा, हर संकट से अटल शुभ्र मस्तक हिमालय हमेशा विजयमान रहोगे। ... ... सुनील शर्मा ...