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प्राचीन काल से ही हिमालयी क्षेत्र में बुग्याल (थाच) का स्थान  महत्वपूर्ण रहा  है । कभी यह देवों, अप्सराओं , यक्षों, किन्नरों, गंधर्वों को क्रीड़ा करते देख आनंद लेता   है , तो कभी यह जैव एवम जीव जगत से सरोबार होकर सबको अपने आगोश में समां लेता है । कभी यह ऋषि-मुनियों , साधु-तपस्वीयों के ध्यानोमग्न में शुन्य हो जाता   है, तो कभी यह अपने पशुधन की सेवा को यंहा आये चरवाहों, गद्दियों को तत्पर रहता है ।। कभी यह प्रकृति से प्रेम करने वाले साधकों को यंहा पा उनका स्वागत करता है , तो कभी यह प्रकृति का दोहन करने वालों को भी यंहा सहता है । जैव एवं जीव जगत से परिपूर्ण ये हिमालयी बुग्याल(थाच प्रकृति की धरती को एक महान देन है हमें इसके महत्व को समझना होगा और इसके समृद्धशाली अस्तित्व को  संजोकर रखना होगा । जय हिमालय    जय महादेव